उमंग गौरवदीप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा 8 अप्रैल 2025, मंगलवार को सातवें वर्ष के अवसर पर राज्य स्तरीय दिव्यांगजन सांस्कृतिक
कार्यक्रम एवं सम्मान समारोह “उमंग उत्सव” का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन दिव्यांगजनों की प्रतिभा, आत्मबल और अदम्य
जज़्बे को समर्पित रहा।“दूर हो मंज़िल, रास्ता मुश्किल… फिर भी चलते जाना रे, राही रे…”इस पंक्ति को सार्थक करते हुए कार्यक्रम ने यह सिद्ध
किया कि जब संघर्ष शारीरिक या मानसिक सीमाओं के साथ हो, तब वह केवल चुनौती नहीं, बल्कि साहस और प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।उमंग
उत्सव के मंच पर मध्यप्रदेश के 20 जिलों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, इटारसी, होशंगाबाद, खंडवा,
विदिशा, राजगढ़, मुरैना, बैतूल, सारणी आदि—से आए दिव्यांगजनों ने अपनी कला और प्रतिभा से दर्शकों को भावविभोर कर दिया।गायन]
नृत्य] नाटक एवं फैशनशो की प्रस्तुतियाँ ऊर्जा, आत्मविश्वास और उल्लास से परिपूर्ण रहीं।मानसिक दिव्यांग बच्चों की संगीतमय प्रस्तुतियों
ने अभिभावकों की आँखों में गर्व और खुशी के आँसू ला दिए।मूकबधिर बच्चों द्वारा प्रस्तुत भारतीय नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर
दिया।दृष्टिबाधित कलाकारों ने अपने स्वर और ताल से पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया।वहीं बहुविकलांगता से ग्रसित छात्र-छात्राओं
द्वारा रामायण के राम-वनवास प्रसंग का सजीव मंचन अत्यंत भावुक कर देने वाला रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ,
जिसमें श्रीमती दीप्ति पटवा (संस्थापक, उमंग गौरवदीप वेलफेयर सोसाइटी), सुश्री अंकिता धाकरे (डिप्टी सेक्रेटरी), श्री आर.के. सिंह (जॉइंट
डायरेक्टर), श्री विश्वजीत झारिया (कार्यालय प्रमुख, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों
की गरिमामयी उपस्थिति रही।सरस्वती वंदना के पश्चात सातवें उमंग उत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ, जिसमें 150 से अधिक दिव्यांगजन
कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि—“जब ईश्वर किसी
रूप में कमी देता है, तो उसके साथ कोई विशेष गुण भी अवश्य प्रदान करता है; आवश्यकता केवल उस हुनर और आत्मविश्वास को निखारने की
होती है।”कार्यक्रम के अंत में संस्थापक श्रीमती दीप्ति पटवा ने सभी अतिथियों] कलाकारों, सहयोगियों एवं दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त
किया।